
A Boat - एक प्रेरणादायक कहानी
एक बार एक Businessman था। वह एक फैक्ट्री खोलना चाहता था और फैक्ट्री के लिए जमीन देखने वह एक गांव की ओर जा रहा था। गांव में पहुंचने से पहले एक नदी आई, उसे उस नदी को पार करना था। नदी को पार करने के लिए उसके पास दो विकल्प थे। या तो वह अपनी कार से बहुत बड़ा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से उस गांव में पहुंचता, या फिर उस नदी में जो नाव चलती थी उस नाव में सवार होकर और नदी को पार करके वह गांव में पहुंच पाता।
उसने दूसरा विकल्प चुना क्योंकि इससे उसका बहुत सारा समय भी बचने वाला था। उसने नाव वाले से नदी पार कराने को कहा और नाव में सवार हो गया। जब नाव बीच नदी में थी तो वह उस नाविक से कुछ सवाल करने लगा। उसने पूछा- क्या तुम मुझे जानते हो। नाविक ने कहा- नहीं साहब। इस पर Businessman बड़ा हैरान हुआ। उसने कहा- क्या तुम मुझे नहीं जानते हो। मेरी फोटो तो आए दिन अखबारों में छपती रहती है। मैं इस देश का बहुत बड़ा Businessman हूँ। क्या तुम अखबार नहीं पढ़ते।
नाविक ने उत्तर दिया- नहीं साहब, मुझे पढ़ना लिखना कहां आता है। Businessman बोला- क्या तुम्हें पढ़ना लिखना नहीं आता और यह कहकर हंसने लगा। फिर उसने दूसरा सवाल किया। उसने बताया कि मैं इस गांव में क्यों जा रहा हूं, तुम्हें पता है? क्योंकि मैं यहां पर एक बहुत बड़ी Mineral Water की फैक्ट्री खोलना चाहता हूं। Mineral Water जानते हो। नाविक बोला- नहीं साहब। Businessman ने समझाया- Mineral Water मतलब पानी जो बोतलों में पैक होकर शहरों मे दुकानों में बिकता है। क्या तुमने शहरों में कभी ऐसी पानी की बोतलें बिकती हुई नहीं देखी।
नाविक ने जवाब दिया- नहीं साहब, मैं कभी शहर गया ही नहीं, मैं कभी इस गांव से बाहर निकला ही नहीं। इतने में Businessman हंसने लगा और कहने लगा- तुम भी कैसे आदमी हो, तुम्हारी जिंदगी तो बेकार है,और तुम जैसे लोग इस पृथ्वी पर व्यर्थ हो। ऐसे में चलते चलते नाव अचानक एक चट्टान से टकरा गई और इससे नाव में एक छेद हो गया और नाव में पानी भरने लगा। नाविक और Businessman दोनों चिंतित हो उठे क्योकि बात अब जान बचाने की थी।
नाविक ने Businessman से कहा- साहब आपको तैरना तो आता है ना। Businessman ने कहा- नहीं मुझे तैरना नहीं आता, क्या हम डूबने वाले हैं? क्या हम मर जाएंगे? और ऐसा सोचकर वह घबरा गया और कहने लगा कि तुम मुझे बचा लो मैं किसी भी कीमत पर जिंदा रहना चाहता हूं। मैं तुम्हें जो तुम मांगो वह सब कुछ दे दूंगा, लेकिन तुम मेरी जान बचा लो।
इस पर नाविक बोला,साहब होंगे आप शहर में रहने वाले बड़े आदमी,लेकिन में भी अपनी मेहनत का कमाता और खाता हूँ ,किसी से भीख नहीं मांगता हूँ। और मुझे अपनी इस नाव चलाने की कला और इस व्यापार पर गर्व है।
और रही बात आपकी जान बचाने की,तो डरने की कोई बात नहीं साहब मुझे तैरना भी आता है और डूबते हुए लोगों को बचाना भी।
आखिरकार Businessman को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने महसूस किया कि कभी किसी भी व्यक्ति को कमजोर नहीं समझना चाहिए। हर इंसान और उसकी कला का अपना एक विशेष महत्त्व है.
शिक्षा - सबका सम्मान करो और हाँ यदि success की राह में सबको साथ लेकर आगे चलोगे तो ,निश्चित ही विजय आपकी ही होगी।
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