MH19 CHIPSWALA success story by business khabri


MH 19 चिप्स वाला success story by business khabri

MH19 चिप्सवाला (MH19 Chipswala) जलगाँव, महाराष्ट्र के दुर्गेश शिम्पी की एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी है, जिन्होंने 9 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद मेहनत की। उन्होंने 15+ अलग-अलग फ्लेवर वाले केले के चिप्स लॉन्च किए, जो अब हर महीने लाखों का टर्नओवर कमा रहे हैं। 

MH 19 चिप्स वाला (MH 19 Chips Vala) की कहानी महाराष्ट्र के जलगाँव (Jalgaon) के दो भाइयों, दुर्गेश शिम्पी (18 साल) और साई शिम्पी (13 साल) के कड़े संघर्ष और सफलता की है। 

उनकी संघर्ष यात्रा के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

बचपन में पिता का साया उठना: दुर्गेश जब केवल 9 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन पर कम उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारियां आ गईं।

शुरुआती संघर्ष: घर चलाने के लिए दुर्गेश ने सातवीं कक्षा से ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने फिनाइल की बोतलें बेचने से लेकर कपड़ों की दुकान में काम करने तक कई छोटे-मोटे काम किए।

बिज़नेस का विचार: जलगाँव के केला बाजार (banana market) में काम करते हुए दुर्गेश ने महसूस किया कि वहां केले की बहुतायत होने के बावजूद कोई बड़ा स्थानीय चिप्स ब्रांड नहीं है। इसी कमी को देखते हुए उन्होंने अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए अपना खुद का ब्रांड शुरू करने की ठानी।

ब्रांड की शुरुआत: उन्होंने अपने शहर जलगाँव के RTO कोड पर अपने ब्रांड का नाम "MH 19 Chips Vala" रखा। उन्होंने छोटे स्तर पर केले के चिप्स बनाना और बेचना शुरू किया और धीरे-धीरे इसकी क्वालिटी और स्वाद के दम पर अपनी पहचान बनाई।

राष्ट्रीय पहचान: उनकी कहानी को बड़ी पहचान तब मिली जब वे शो "भारत के सुपर फाउंडर्स" (Bharat Ke Super Founders) में नजर आए। उनकी मेहनत और ईमानदारी से प्रभावित होकर अभिनेता सुनील शेट्टी ने उन्हें गले लगा लिया और कई निवेशकों ने उन्हें वित्तीय सहायता और मेंटरशिप देने का वादा किया।

वर्तमान सफलता: आज यह ब्रांड करीब ₹3 करोड़ की वैल्यूएशन वाला स्टार्टअप बन चुका है। दुर्गेश और साई, जो अभी भी अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, महीने में ₹1.5 लाख से ₹4.2 लाख तक का टर्नओवर कर रहे हैं। 


MH19 चिप्सवाला सफलता की मुख्य बातें:

संस्थापक: दुर्गेश शिम्पी और उनके छोटे भाई साई।

उत्पाद: बिना प्रिज़र्वेटिव वाले अनोखे केले के चिप्स।

विविधता: 15+ फ्लेवर्स (जैसे- पेरी-पेरी, क्रीम एंड अनियन आदि)।

टर्नओवर: प्रतिदिन या प्रति माह 1.5 लाख से 4.2 लाख रुपये का कारोबार।

शुरुआत: घर से फालूदा प्रीमिक्स बेचने से की और फिर स्थानीय मार्केट की जरूरत को पहचान कर चिप्स व्यवसाय में कदम रखा। 

सफलता का कारण:

दुर्गेश ने बाजार की कमी को समझा और केवल पारंपरिक चिप्स बेचने के बजाय, उन्होंने विभिन्न स्वादों में अभिनव चिप्स पेश किए, जिससे उन्हें बहुत सफलता मिली

हम आशा करते हैं इस सक्सेस स्टोरी से आपको कुछ सीखने को मिला होगा।

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